रमल प्रश्नावली रमल प्रश्नावली इस प्रश्नावली का तरीका है कि चंदन की लकड़ी का चौकोर पासा बनाकर उस पर १, २, ३, ४ खुदवा लें। फिर अपने कार्य का चिंतन करते हुए तीन बार पासा छोड़ें। उसका जो अंक आये, उसी अंक पर फल देखें। यदि किसी के पास पासा नहीं हो तो, नीचे दी गई सारणी… Read More Like this:Like Loading…
New version of sholey ई-मेल पर श्वेता जी ने एक मजेदार वार्त्तालाप भेजा है, आप भी आनन्द लीजिये Jay : Mausi, ladka Satyam mein kaam karta hai.. Mausi : Hai ram..!!! Aur kahin try kar raha hai kya?? Jay : kahan mausi, 2 saal Satyam me rahne ke baad koi Company leti kahan hai… Mausi : Hi Raam to… Read More Like this:Like Loading…
देवोत्थान, प्रबोधिनी या देव उठनी एकादशी देवोत्थान, प्रबोधिनी या देव उठनी एकादशी यह तो प्रसिद्ध ही है कि आषाढ़ शुक्ल से कार्तिक शुक्ल एकादशी पर्यन्त ब्रह्मा, इन्द्र, रुद्र, अग्नि, वरुण, कुबेर, सूर्य और सोमादि देवों से वन्दित जगन्निवास, योगेश्वर क्षीरसागर में शेषशय्या पर चार मास शयन करते हैं और भगवद्भक्त उनके शयनपरिवर्तन और प्रबोध के यथोचित कृत्य दत्तचित होकर यथासमय करते… Read More Like this:Like Loading…
पञ्च-दशी यन्त्र से भगवती लक्ष्मी की कृपा-प्राप्ति “दीपावली” की सन्ध्या में सूर्यास्त के बाद उक्त यन्त्र लिखना प्रारम्भ करे। अगले दिन सूर्योदय तक यन्त्र लिखता रहे। सूर्योदय के समय अन्तिम यन्त्र एक बड़े कागज के ऊपर लिखकर ‘पूजा-स्थान में रखे। उसे धूप-दीप दिखाए। साथ ही, एक छोटा यन्त्र भी बनाकर उसे ‘ताबीज’ में भरकर गले में धारण करे। ‘दीपावली’ की रात्रि में… Read More Like this:Like Loading…
Ahoi ashtami-अहोई अष्टमी अहोई अष्टमी यह व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाया जाता है। यह व्रत छोटे बच्चों के कल्याण के लिये किया जाता है। इस दिन बच्चों की माता पूरे दिन व्रत रखती है। इस दिन सांयकाल तारे निकलने के बाद दीवार पर अहोई बनाकर उसकी पूजा करें। व्रत रखने वाली माताऐं कहानी सुनें। कहानी सुनने… Read More Like this:Like Loading…
ब्रह्मपुराण में वर्णित लक्ष्मी जी के ध्यान व मन्त्र लक्ष्मी ध्यान (१) सहस्त्रदलपद्मस्य कर्णिकावासिनीं पराम्। शरत्पार्वणकोटीन्दुप्रभाजुष्टवराम्बराम्।। स्वतेजसा प्रज्वलन्तीं सुखदृश्यां मनोहराम्। प्रतप्तकाञ्चननिभां शोभां मूर्तिमतीं सतीम्।। रत्नभूषणभूषाढ्यां शाभितां पीतवाससा। ईषद्धास्यप्रसन्नास्यां शश्वत्सुस्थिरयौवनाम्।। सर्वसम्पत्प्रदात्रीं च महालक्ष्मीं भजे शुभाम्। (ब्रह्मवैवर्त्त पुराण।प्रकृतिखण्ड।३९।१०-१२॰५) भावार्थः- परम-पूज्या भगवती महालक्ष्मी सहस्त्र दलवाले कमल की कर्णिकाओं पर विराजमान हैं। इनकी सुन्दर साड़ी शरत्पूर्णिमा के करोड़ों चन्द्रमाओं की शोभा से सम्पन्न है। ये परम साध्वी देवी… Read More Like this:Like Loading…
सर्वैश्वर्यप्रद-लक्ष्मी-कवच सर्वैश्वर्यप्रद-लक्ष्मी-कवच श्रीमधुसूदन उवाच गृहाण कवचं शक्र सर्वदुःखविनाशनम्। परमैश्वर्यजनकं सर्वशत्रुविमर्दनम्।। ब्रह्मणे च पुरा दत्तं संसारे च जलप्लुते। यद् धृत्वा जगतां श्रेष्ठः सर्वैश्वर्ययुतो विधिः।। बभूवुर्मनवः सर्वे सर्वैश्वर्ययुतो यतः। सर्वैश्वर्यप्रदस्यास्य कवचस्य ऋषिर्विधि।। पङ्क्तिश्छन्दश्च सा देवी स्वयं पद्मालया सुर। सिद्धैश्वर्यजपेष्वेव विनियोगः प्रकीर्तित।। यद् धृत्वा कवचं लोकः सर्वत्र विजयी भवेत्।। ।।मूल कवच पाठ।। मस्तकं पातु मे पद्मा कण्ठं पातु हरिप्रिया।… Read More Like this:Like Loading…
कवच के प्रयोग कवच के प्रयोग तन्त्रों में कवच पाठ की कुछ विशिष्ट विधीयाँ भी उपलब्ध है। यथा- ॰ प्रातः, मध्याह्न एवं सायं – तीनों सन्ध्याओं में कवच का पाठ करने से शीघ्र सिद्धि सुलभ होती है। ॰ “गुरु” की पूजा कर तीन बार या एक बार ज्ञान-सहित कवच का पाठ करे। इस प्रकार नित्य पाठ करने से… Read More Like this:Like Loading…
सर्वापत्ति-निवारक हनुमान-स्तुति सर्वापत्ति-निवारक हनुमान-स्तुति ॐ सीता-राम जानत हों, सीता-राम मानत हों। सीता-राम पूजत, जपत सीता-राम हों। सीता-राम सों बसै प्राण, ध्यान धरत सीता-राम अभिराम हों। सीता-राम तेरे मन की कल्प-तरु, सीता-राम सों सनेह, सीता-राम को गुलाम हों। शिखा वज्र, नयन वज्र, तेरो मुख-दन्त वज्र, छाती-भुज पिंग-वज्र। लाल-लाल दन्त हैं, काया लाल, ग्रीवा लाल, वसन लंगुर लाल, असन-अधर… Read More Like this:Like Loading…
हनुमत्सहस्त्र नामावली हनुमत्सहस्त्र नामावली विनियोगः- ॐ अस्य श्रीहनुमत्सहस्त्रनामस्तोत्रमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः हनुमान देवता, अनुष्टुप छन्द, ह्रां बीजं श्रीं शक्ति, श्रीहनुमत्प्रीत्यर्थं-तद्सहस्त्रनामभिरमुकसंख्यार्थ पुष्पादिद्रव्य समर्पणे विनियोगः। ध्यानः- ध्यायेद् बालदिवाकर-द्युतिनिभ देवारिदर्पापहं देवेन्द्रमुख-प्रशा्तयकसं देदीप्यमान रुचा। सुग्रीवादिसमतवानरयुतं सुव्यक्ततत्त्वप्रियं संरक्तारुणलोचनं पवनजं पीताम्बरालंकृतम्।। उद्यदादित्यसंकाशमुदारभुजविक्रमम्। कन्दर्पकोटिलावण्य सर्वविद्याविशारदम्।। श्रीरामहृदयानन्दं भक्तकल्पमहीरुहम्। अभयं वरदं दोर्म्मा चिन्तयेन्मारुतात्मजम्।। ॐ हनुमते नमः | ॐ श्री प्रदाय नमः | ॐ वायु पुत्राय नमः | … Read More Like this:Like Loading…