ब्रह्मपुराण में वर्णित लक्ष्मी जी के ध्यान व मन्त्र लक्ष्मी ध्यान (१) सहस्त्रदलपद्मस्य कर्णिकावासिनीं पराम्। शरत्पार्वणकोटीन्दुप्रभाजुष्टवराम्बराम्।। स्वतेजसा प्रज्वलन्तीं सुखदृश्यां मनोहराम्। प्रतप्तकाञ्चननिभां शोभां मूर्तिमतीं सतीम्।। रत्नभूषणभूषाढ्यां शाभितां पीतवाससा। ईषद्धास्यप्रसन्नास्यां शश्वत्सुस्थिरयौवनाम्।। सर्वसम्पत्प्रदात्रीं च महालक्ष्मीं भजे शुभाम्। (ब्रह्मवैवर्त्त पुराण।प्रकृतिखण्ड।३९।१०-१२॰५) भावार्थः- परम-पूज्या भगवती महालक्ष्मी सहस्त्र दलवाले कमल की कर्णिकाओं पर विराजमान हैं। इनकी सुन्दर साड़ी शरत्पूर्णिमा के करोड़ों चन्द्रमाओं की शोभा से सम्पन्न है। ये परम साध्वी देवी… Read More Like this:Like Loading…
हनुमत्सहस्त्र नामावली हनुमत्सहस्त्र नामावली विनियोगः- ॐ अस्य श्रीहनुमत्सहस्त्रनामस्तोत्रमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः हनुमान देवता, अनुष्टुप छन्द, ह्रां बीजं श्रीं शक्ति, श्रीहनुमत्प्रीत्यर्थं-तद्सहस्त्रनामभिरमुकसंख्यार्थ पुष्पादिद्रव्य समर्पणे विनियोगः। ध्यानः- ध्यायेद् बालदिवाकर-द्युतिनिभ देवारिदर्पापहं देवेन्द्रमुख-प्रशा्तयकसं देदीप्यमान रुचा। सुग्रीवादिसमतवानरयुतं सुव्यक्ततत्त्वप्रियं संरक्तारुणलोचनं पवनजं पीताम्बरालंकृतम्।। उद्यदादित्यसंकाशमुदारभुजविक्रमम्। कन्दर्पकोटिलावण्य सर्वविद्याविशारदम्।। श्रीरामहृदयानन्दं भक्तकल्पमहीरुहम्। अभयं वरदं दोर्म्मा चिन्तयेन्मारुतात्मजम्।। ॐ हनुमते नमः | ॐ श्री प्रदाय नमः | ॐ वायु पुत्राय नमः | … Read More Like this:Like Loading…