श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -003 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -003 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ तीसरा अध्याय अलिङ्ग एवं लिङ्गतत्त्व का स्वरूप, शिवतत्त्व की व्यापकता, महदादि तत्त्वों का विवेचन, जगत् की उत्पत्ति का क्रम तथा महेश्वर शिव की महिमा श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे तृतीयोऽध्यायः प्राकृतप्राथमिकसर्गकथनं सूतजी बोले — वह निर्गुण ब्रह्म शिव (अलिङ्ग) ही लिङ्ग (प्रकृति) – का मूल कारण है तथा स्वयं लिङ्गरूप (प्रकृतिरूप)… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -002 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -002 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ दूसरा अध्याय लिङ्गपुराण का परिचय तथा इसमें प्रतिपादित विषयों का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे द्वितीयोऽध्यायः अनुक्रमणिका वर्णनं सूतजी बोले — ईशानकल्प में लिङ्ग के प्रादुर्भाव आदि से सम्बद्ध वृत्तान्तों को आश्रित करके महात्मा ब्रह्मा ने सर्वप्रथम श्रेष्ठ लिङ्गपुराण की उद्भावना की ॥ १ ॥ सौ करोड़ विस्तारवाले पुराणसमुच्चय में… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -001 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -001 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ पहला अध्याय देवर्षि नारदजी का नैमिषारण्य-आगमन, श्रीसूत-शौनक-संवाद में लिङ्गमहापुराण का उपक्रम श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे प्रथमोऽध्यायः लिङ्गोद्भवप्रतिज्ञावर्णनं ॥ श्रीगणेशजी को नमस्कार है ॥ ॥ भगवान् शिव को नमस्कार है ॥ नमो रुद्राय हरये ब्रह्मणे परमात्मने । प्रधानपुरुषेशाय सर्गस्थित्यन्तकारिणे ॥ १ ॥ जगत् की उत्पत्ति, स्थिति एवं अन्त के कारणीभूत [कारक]… Read More Like this:Like Loading…
स्वामिकार्तिकेय द्वारा श्रीगणेश का स्तवन स्वामिकार्तिकेय द्वारा श्रीगणेश का स्तवन भक्त मनोरथ सिद्धिप्रद स्तोत्र ॥ स्कन्द उवाच ॥ नमस्ते योगरूपाय सम्प्रज्ञातशरीरिणे । असम्प्रज्ञातमूर्ध्न ते तयोर्योगमयाय च ॥ वामाङ्गे भ्रान्तिरूपा ते सिद्धिः सर्वप्रदा प्रभो । भ्रान्तिधारकरूपा वै बुद्धिस्ते दक्षिणाङ्गके ॥ मायासिद्धिस्तथा देवो मायिको बुद्धिसंज्ञितः । तयोर्योगे गणेशान त्वं स्थितोऽसि नमोऽस्तु ते ॥ जगद्रूप गकारश्च णकारो ब्रह्मवाचकः । तयोर्योगे गणेशाय नाम तुभ्यं… Read More Like this:Like Loading…
गजाननस्तोत्रम् पुरुषार्थचतुष्टय की प्राप्ति के लिये गजाननस्तोत्रम् ॥ देवर्षय ऊचुः ॥ विदेहरूपं भवबन्धहारं सदा स्वनिष्ठं स्वसुखप्रदं तम् । अमेयसांख्येन च लक्ष्मीशं गजाननं भक्तियुतं भजामः ॥ मुनीन्द्रवन्द्यं विधिबोधहीनं सुबुद्धिदं बुद्धिधरं प्रशान्तम् । विकारहीनं सकलाङ्गकं वै गजाननं भक्तियुतं भजामः ॥ अमेयरूपं हृदि संस्थितं तं ब्रह्माहमेकं भ्रमनाशकारम्। अनादिमध्यान्तमपाररूपं गजाननं भक्तियुतं भजामः ॥ जगत्प्रमाणं जगदीशमेवमगम्यमाद्यं जगदादिहीनम्। अनात्मनां मोहप्रदं पुराणं गजाननं… Read More Like this:Like Loading…
श्री-बृहत्-महा-सिद्ध-कुञ्जिका-स्तोत्रम् श्री-बृहत्-महा-सिद्ध-कुञ्जिका-स्तोत्रम् ॥ शिव उवाच ॥ शृणु देवि! प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिका-स्तोत्रमुत्तमम् । येन मन्त्र-प्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत् ॥ 1 ॥ न कवचं नार्गला तु, कीलकं न रहस्यकम् । न सूक्तं नापि ध्यानं च, न न्यासो न च वाऽर्चनम् ॥ 2 ॥ कुञ्जिका-पाठ-मात्रेण, दुर्गा-पाठ-फलं लभेत् । अति गुह्यतरं देवि! देवानामपि दुर्लभम् ॥ 3 ॥ गोपनीयं प्रयत्नेन, स्वयोनिरिव पार्वति… Read More Like this:Like Loading…
सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् शिव उवाच शृणु देवि प्रवक्षयामि कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्। येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजाप: शुभो भवेत्॥1॥ न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्। न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्॥2॥ कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्। अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्॥3॥ गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति। मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्। पाठमात्रेण संसिद्धयेत् कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्॥4॥ अथ मन्त्र: ॐ ऐं ह्री कीं चामुण्डायै विच्चे॥… Read More Like this:Like Loading…
अष्ट-गन्ध अष्ट-गन्ध ‘यन्त्र’ लिखते समय अथवा पूजन में ‘अष्ट-गन्ध’ के सम्बन्ध में कुछ विशेष बातें इस प्रकार है- देवताओं के लिए ‘अष्ट-गन्ध’ इस प्रकार है- (क) १॰ अगर, २॰ तगर, ३॰ गोरोचन, ४॰ कस्तूरी, ५॰ श्वेत-चन्दन, ६॰ लाल-चन्दन, ७॰ सिन्दूर और ८॰ केशर। अथवा, (ख) १॰ कपूर, २॰ कस्तूरी, ३॰ केशर, ४॰ गोरोचन, ५॰ संगरफ, ६॰… Read More Like this:Like Loading…
पूजा के विविध उपचार पूजा के विविध उपचार संक्षेप और विस्तार के भेद से पूजा के अनेकों प्रकार के उपचार हैं- पञ्चोपचार-१॰ गन्ध, २॰ पुष्प, ३॰ धूप, ४॰ दीप और ५॰ नैवेद्य। दस उपचार– १॰ पाद्य, २॰ अर्घ्य, ३॰ आचमन, ४॰ स्नान, ५॰ वस्त्र-निवेदन, ६॰ गन्ध, ७॰ पुष्प, ८॰ धूप, ९॰ दीप और १०॰ नैवेद्य। सोलह उपचार- १॰ पाद्य,… Read More Like this:Like Loading…
श्री हनुमद्ष्टोत्तर-शत-नामावली श्री हनुमद्ष्टोत्तर-शत-नामावली ॐ आंजनेयाय विद्महे महाबलाय धीमहि तन्नो हनुमान प्रचोदयात् ॐ आंजनेयाय नमः। ॐ महा-वीराय नमः। ॐ हनुमते नमः। ॐ मारूतात्मजाय नमः। ॐ तत्त्व-ज्ञान-प्रदाय नमः। ॐ सीता-देवी-मुद्रा-प्रदायकाय नमः। ॐ अशोक-वनिका-छेत्रे-नमः। ॐ सर्व-माया-विभंजनाय नमः। ॐ सर्व-बन्ध-विमोक्त्रे नमः। ॐ रक्षो-विध्वंस-कारकाय नमः। ॐ पर-विद्या-परीहाराय नमः। ॐ पर-शौर्य-विनाशनाय नमः। ॐ पर-मन्त्र-निराकत्र्रे नमः। ॐ पर-यन्त्र-प्रभेदकाय नमः। ॐ सर्व-ग्रह-विनाशाय नमः। ॐ… Read More Like this:Like Loading…