विनियोग – ॐ अस्य श्रीमहागणपति सहस्त्रनामावलि-महामन्त्रस्य श्रीगणेश ऋषि। अनुष्टुप् छन्द:। श्रीमहागणपति देवता। गं बीजम्। हुं शक्ति:। स्वाहा कीलकं। श्रीमहागणपति प्रसाद सिद्धयर्थे जपे विनियोग:। ऋष्यादि-न्यास कर न्यास अंग विन्यास श्रीगणेश ऋषये नम: गां अंगुष्ठाभ्यां नम: गां हृदयाय नम: अनुष्टुप छन्दसे नम: मुखे गीं तर्जनीभ्यां नम: गीं शिरसे स्वाहा श्रीमहागणपति देवतायै नम: हृदि गूं मध्यमाभ्यां नम: गूं शिखायै वषट् गं बीजाय नम: गुह्ये गैं अनामिकाभ्यां नम: गैं कवचाय हुं हुं शक्तये नम: नाभौ गौं कनिष्ठिकाभ्यां नम: गा नेत्र त्रयाय वौषट् स्वाहा कीलकाय नम: पादयो: ग: करतलकर पृष्ठाभ्यां नम: ग: अस्त्राय फट् श्रीमहागणपति प्रीत्यथेZ जपे विनियोगाय नम: सर्वांगे दिग् बन्धन – `भूर्भुव: स्व: ॐ´ से ध्यान – पंच वक्त्रो दश भुजो, ललाटेन्दु: शशि-प्रभ:। मुण्डमाल: सर्पभूषो, मुकुटांगद-भूषण:।। अग्न्यर्क-शशिनो भाभि:, तिरस्कुर्वन् दशायुध:। सर्वविघ्न हरो देव, तं ध्यायामि दिवा-निशम्।। मानस पूजन – लं पृथिव्यात्मने श्रीमहागणपतये गन्धं लेपयामि। हं आकाशात्मने श्रीमहागणपतये पुष्पाणि समर्पयामि। यं वाय्वात्मने श्रीमहागणपतये धूपं घ्रापयामि। रं अग्न्यात्मने श्रीमहागणपतये दीपं दर्श्रयामि। वं अमृतात्मने श्रीमहागणपतये नैवेद्यं निवेदयामि। ॐ गणेश्वराय नम: ॐ गण-क्रीडाय नम: ॐ गण-नाथाय नम: ॐ गणाधिपाय नम: ॐ एक-दंष्ट्राय नम: ॐ वक्र-तुण्डाय नम: ॐ गज-वक्त्राय नम: ॐ महोदराय नम: ॐ लम्बोदराय नम: ॐ धूम्र-वर्णाय नम: ॐ विकटाय नम: ॐ विध्न-नायकाय नम:( विध्न-नाशनाय नम:) ॐ सु-मुखाय नम: ॐ दुर्मुखाय नम: ॐ बुद्धाय नम: ॐ विध्न-राजाय नम: ॐ गजाननाय नम: ॐ भीमाय नम: ॐ प्रमोदाय नम: ॐ आमोदाय नम: ॐ सुरानन्दाय नम: ॐ मदोत्कटाय नम: ॐ हेरम्बाय नम: ॐ शम्बराय नम: ॐ शम्भवे नम: ॐ लम्ब-कर्णाय नम: ॐ महा-बलाय नम: ॐ नन्दनाय नम: ॐ अ-लम्पटाय नम: ॐ अ-भीरवे नम: (भीमाय नम:) ॐ मेघ-नादाय नम: ॐ गणज्याय नम: ॐ विनायकाय नम: ॐ विरूपाक्षाय नम: ॐ धीर-शूराय नम: ॐ वर-प्रदाय नम: ॐ महा-गणपतये नम: ॐ बुद्धि-प्रियाय नम: ॐ क्षिप्र-प्रसादनाय नम: ॐ रूद्र-प्रियाय नम: ॐ गणाध्यक्षाय नम: ॐ उमा-पुत्राय नम: ॐ अघ-नाशनाय नम: ॐ कुमार-गुरवे नम: ॐ ईशान-पुत्राय नम: ॐ मूषक-वाहनाय नम: ॐ सिद्धि-प्रियाय नम: ॐ सिद्धि-पतये नम: ॐ सिद्धाय नम: ॐ सिद्धि-विनायकाय नम: ॐ अ-विघ्नाय नम: ॐ तुम्बुरवे नम: ॐ सिंह-वाहनाय नम: ॐ मोहिनी-प्रियाय नम: ॐ कटंकाय नम: ॐ राज-पुत्राय नम: ॐ शालकाय नम: ॐ सिम्मताय नम: ॐ अमिताय नम: ॐ कूष्माण्ड-साम-सम्भूतये नम: ॐ दुर्जयाय नम: ॐ धूर्जयाय नम: ॐ जयाय नम: ॐ भू-पतये नम: ॐ भुवन-पतये नम: ॐ भूतानां पतये नम: ॐ अव्ययाय नम: ॐ विश्व-कर्त्रे नम: ॐ विश्व-मुखाय नम: ॐ विश्व-रूपाय नम: ॐ निधये नम: ॐ घृणये नम: ॐ कवये नम: ॐ कवीनामृषभाय नम: ॐ ब्रह्मण्याय नम: ॐ ब्रह्मणस्पनये नम: ॐ ज्येष्ठ-राजाय नम: ॐ निधि-पतये नम: ॐ निधि-प्रिय-पति-प्रियाय नम: ॐ हिरण्मय-पुरान्त:-स्थाय नम: ॐ सूर्य-मण्डल-मध्यगाय नम: ॐ कराहति-ध्वस्त-सिन्धु-सलिलाय नम: ॐ पूष-दन्त भिदे नम: ॐ उमांक-केलि-कुतुकिने नम: ॐ मुक्तिदाय नम: ॐ कुलपालनाय नम: ॐ किरीटिने नम: ॐ कुण्डलिने नम: ॐ हारिणे नम: ॐ वन-मालिने नम: ॐ मनो-मयाय नम: ॐ वैमुख्य-हत-दैत्य-श्रिये नम: ॐ पादाहति-जित-क्षितये नम: ॐ सद्योजात-स्वर्ण-मुञ्ज-मेखलिने नम: ॐ दुर्निमित्त-हृते नम: ॐ दुस्स्वप्ने-हृते नम: ॐ प्र-सहनाय नम: ॐ गुणिने नम: ॐ नाद-प्रतिष्ठिताय नम: ॐ सु-रूपाय नम: ॐ सर्व-नेत्राधि-वासाय नम: ॐ वीरासनाश्रयाय नम: ॐ पीताम्बराय नम: ॐ खण्ड-रदाय नम: ॐ खण्डेन्दु-कृत-शेखराय नम: ॐ चित्रांक-श्याम-दशनाय नम: ॐ भाल-चन्द्राय नम: ॐ चतुर्भुजाय नम: ॐ योगाधिपाय नम: ॐ तारकस्थाय नम: ॐ पुरूषाय नम: ॐ गज-कर्णकाय नम: ॐ गणाधि-राजाय नम: ॐ विजय-स्थिराय नम: ॐ गजपति-ध्वजिने नम: ॐ देव-देवाय नम: ॐ स्मर-प्राण-दीपकाय नम: ॐ वायु-कीलकाय नम: ॐ विपश्चिद्-वरदाय नम: ॐ नादोन्नाद-भिन्न-बलाहकाय नम: ॐ वराह-रदनाय नम: ॐ मृत्युज्याय नम: ॐ व्याघ्राजिनाम्बराय नम: ॐ इच्छा-शक्ति-धराय नम: ॐ देव-त्रात्रे नम: ॐ दैत्य-विमर्दनाय नम: ॐ शम्भु-वक्त्रोद्भवाय नम: ॐ शम्भु-कोपघ्ने नम: ॐ शम्भु-हास्य-भुवे नम: ॐ शम्भु-तेजसे नम: ॐ शिवा-शोक-हारिणे नम: ॐ गौरी-सुखावहाय नम: ॐ उमांग-मलजाय नम: ॐ गौरी-तेजो-भुवे नम: ॐ स्वर्धुनी-भवाय नम: ॐ यज्ञ-कायाय नम: ॐ महा-नादाय नम: ॐ गिरि-वर्ष्मणे नम: ॐ शुभाननाय नम: ॐ सर्वात्मने नम: ॐ सर्व-देवात्मने नम: ॐ ब्रह्म-मूर्ध्ने नम: ॐ ककुप्-छुतये नम: ॐ ब्रह्माण्ड-कुम्भाय नम: ॐ चिद्-व्योम-भालाय नम: ॐ सत्य-शिरोरूहाय नम: ॐ जगज्जन्म-लयोन्मेष-निमेषाय नम: ॐ अग्नयर्क-सोम-दृशे नम: ॐ गिरीन्द्रैक-रदाय नम: ॐ धर्माधर्मोष्ठाय नम: ॐ साम-बृंहिताय नम: ॐ ग्रहर्क्ष-दशनाय नम: ॐ वाणी-जिह्वाय नम: ॐ वासव-नासिकाय नम: ॐ कुलाचलांसाय नम: ॐ सोमार्क-घण्टाय नम: ॐ रूद्र-शिरो-धराय नम: ॐ नदी-नद-भुजाय नम: ॐ सर्पांगुलीकाय नम: ॐ तारका-नखाय नम: ॐ भ्रू-मध्य-संस्थित-कराय नम: ॐ ब्रह्म-विद्या-मदोत्कटाय नम: ॐ व्योम-नाभये नम: ॐ श्री-हृदयाय नम: ॐ मेरू-पृष्ठाय नम: ॐ अर्णवोदराय नम: ॐ कुक्षिस्थ-यक्ष-गन्धर्व-रक्ष:-किन्नर-मानुषाय नम: ॐ पृथ्वी-कटये नम: ॐ सृष्टि-लिंगाय नम: ॐ शैलोरवे नम: ॐ दस्र-जानुकाय नम: ॐ पाताल-जंघाय नम: ॐ मुनि पदे नम: ॐ कालाङ्गुष्ठाय नम: ॐ त्रयी-तनवे नम: ॐ ज्योतिर्मण्डल-लाङ्गूलाय नम: ॐ हृदयालान-निश्चलाय नम: ॐ हृत्-पद्म-कर्णिका-शालि-वियत्-केलि-सरोवराय नम: ॐ सद्-भक्त-ध्यान-निगडाय नम: ॐ पूजा-वारी-निवारिताय नम: ॐ प्र-तापिने नम: ॐ कश्यप-सुताय नम: ॐ गणपाय नम: ॐ विष्टपिने नम: ॐ बलिने नम: ॐ यशस्विने नम: ॐ धार्मिकाय नम: ॐ स्वोजसे नम: ॐ प्रथमाय नम: ॐ प्रथमेश्वराय नम: ॐ चिन्ता-मणि-द्वीप-पतये नम: ॐ कल्प-द्रुम-वनालयाय नम: ॐ रत्न-मण्डप-मध्यस्थाय नम: ॐ रत्न-सिंहासनाश्रयाय नम: ॐ तीव्रा-शिरो-धृत-पदाय नम: ॐ ज्वालिनी-मौलि-लालिताय नम: ॐ नन्दा-नन्दित-पीठ-श्रिये नम: ॐ भोगदा-भूषितासनाय नम: ॐ सकाम-दायिनी-पीठाय नम: ॐ स्फुरदुग्रासनाश्रयाय नम: ॐ तेजो-वती-शिरो-रत्नाय नम: ॐ सत्या-नित्या·वतंसिताय नम: ॐ स-विघ्न-नाशिनी-पीठाय नम: ॐ सर्व-शक्त्यम्बुजाश्रयाय नम: ॐ लिपि-पद्मसनाधाराय नम: ॐ विन्ह-धाम-त्रयाश्रयाय नम: ॐ उन्नत-प्रपदाय नम: ॐ गूढ़-गुल्फाय नम: ॐ संवृत-पार्ष्णिकाय नम: ॐ पीन-जंघाय नम: ॐ श्लिष्ट-जानवे नम: ॐ स्थूलारवे नम: ॐ प्रोन्नमत्-कटये नम: ॐ निम्न-नाभये नम: ॐ स्थूल-कुक्षये नम: ॐ पीन-वक्षसे नम: ॐ बृहद्-भुजाय नम: ॐ पीन-स्कन्धाय नम: ॐ कम्बु-कण्ठाय नम: ॐ लम्बोष्ठाय नम: ॐ लम्ब-नासिकाय नम: ॐ भग्न-वाम-रदाय नम: ॐ तुंगाय सव्य-दन्ताय नम: ॐ महा-हनवे नम: ॐ ह्रस्व-नेत्र-त्रयाय नम: ॐ शूर्प-कर्णाय नम: ॐ निबिड-मस्तकाय नम: ॐ स्तबकाकार-कुम्भाग्राय नम: ॐ रत्न-मौलये नम: ॐ निरंकुशाय नम: ॐ सर्प-हार-कटी-सूत्राय नम: ॐ सर्प-यज्ञोपवीत-वते नम: ॐ सर्प-कोटीर-कटकाय नम: ॐ सर्प-ग्रैवेयकांगदाय नम: ॐ सर्प-कक्षोदराबन्धाय नम: ॐ सर्प-राजोत्तरीयकाय नम: ॐ रक्ताय नम: ॐ रक्ताम्बर-धराय नम: ॐ रक्त-माल्य-विभूषणाय नम: ॐ रक्तेक्षणाय नम: ॐ रक्त-कराय नम: ॐ रक्त-ताल्वोष्ठ-पल्लवाय नम: ॐ श्वेताय नम: ॐ श्वेताम्बर-धराय नम: ॐ श्वेत-माल्य-विभूषणाय नम: ॐ श्वेतात-पत्र-रूचिराय नम: ॐ श्वेत-चामर-वीजिताय नम: ॐ सर्वावयव-सम्पूर्ण-सर्वलक्षण-लक्षिताय नम: ॐ सर्वाभरण-शोभाढयाय नम: ॐ सर्व-शोभा-समन्विताय नम: ॐ सर्व-मंगल-मांगल्याय नम: ॐ सर्व-कारण-कारणाय नम: ॐ सर्वदैक-कराय नम: ॐ शांर्गिणे नम: ॐ बीजापूरिणे नम: ॐ गदा-धराय नम: ॐ इक्षु-चाप-धराय नम: ॐ शूलिने नम: ॐ चक्र-पाणये नम: ॐ सरोज-भृते नम: ॐ पाशिने नम: ॐ धृतोत्पलाय नम: ॐ शालि-मंजरी-भृते नम: ॐ स्व-दन्त-भृते नम: ॐ कल्प-वल्ली-धराय नम: ॐ विश्वाभयदैक-कराय नम: ॐ वशिने नम: ॐ अक्ष-माला-धराय नम: ॐ ज्ञान-मुद्रा-वते नम: ॐ मुद्गरायुधाय नम: ॐ पूर्ण-पात्रिणे नम: ॐ कम्बु-धराय नम: ॐ विधृतालि-समुद्रकाय नम: ॐ मातु-लुंग-धराय नम: ॐ चूत-कालिका-भृते नम: ॐ कुठार-वते नम: ॐ पुष्करस्थ-स्वर्ण-घटी-पूर्णरत्नाभि-वर्षकाय नम: ॐ भारती-सुन्दरी-नाथाय नम: ॐ विनायक-रति-प्रियाय नम: ॐ महालक्ष्मी-प्रियतमाय नम: ॐ सिद्धलक्ष्मी-मनोरमाय नम: ॐ रमा-राकेश-पूर्वांगाय नम: ॐ दक्षिणोमा-महेश्वराय नम: ॐ मही-वराह-वामांगाय नम: ॐ रति-कन्दर्प-पश्चिमाय नम: ॐ आमोद-मोद-जननाय नम: ॐ स-प्रमोद-प्रमोदनाय नम: ॐ समेधित-समृद्धि-श्रिये नम: ॐ ऋद्धि-सिद्धि प्रवर्तकाय नम: ॐ दत्त-सौमुख्य-सुमुखाय नम: ॐ कान्ति-कन्दलिताश्रयाय नम: ॐ मदना-वत्याश्रिताङ्घ्रये नम: ॐ कृत्त-दौर्मुख्य-दुर्मुखाय नम: ॐ विघ्न-सम्पल्लवोपघ्न-सेवाय नम: ॐ उन्निद्र-मद-द्रवाय नम: ॐ विघ्न-कृन्निघ्न-चरणाय नम: ॐ द्राविणी-शक्ति-सत्-कृताय नम: ॐ तीव्रा-प्रसन्न-नयनाय नम: ॐ ज्वालिनी-पालितैक-दृशे नम: ॐ मोहिनी-मोहनाय नम: ॐ भोग-दायिनी-कान्ति-मण्डिताय नम: ॐ कामिनी-कान्त-वक्त्र-श्रिये नम: ॐ अधिष्ठित-वसुन्धराय नम: ॐ वसुन्धरा-मदोन्नद्ध-महाशंख-निधि-प्रभवे नम: ॐ नमद्-वसुमती-मौलि-महापद्म-निधि-प्रभवे नम: ॐ सर्व-सद्गुरू-संसेव्याय नम: ॐ शोचिष्केश-हृदाश्रयाय नम: ॐ ईशान-मूर्ध्ने नम: ॐ देवेन्द्र-शिखायै नम: ॐ पवन-नन्दनाय नम: ॐ अग्र-प्रत्यग्र-नयनाय नम: ॐ दिव्यास्त्राणां प्रयोग-विदे नम: ॐ ऐरावतादि-सर्वाशा-वारणावरण-प्रियाय नम: ॐ वज्राद्यस्त्र-परीवाराय नम: ॐ गए-चण्ड-समाश्रयाय नम: ॐ जयाजय-परीवाराय नम: ॐ विजया-विजयावहाय नम: ॐ अजितार्चित-पादाब्जाय नम: ॐ नित्यानित्याऽवतंसिताय नम: ॐ विलासिनी-कृतोल्लासाय नम: ॐ शौण्डी-सौन्दर्य-मण्डिताय नम: ॐ अनन्तानन्त-सुखदाय नम: ॐ सुमंगल-मंगलाय नम: ॐ इच्छाशक्ति-ज्ञानशक्ति-क्रियाशक्ति-निषेविताय नम: ॐ सुभगा-संश्रित-पदाय नम: ॐ ललिता-ललिताश्रयाय नम: ॐ कामिनी-कामनाय नम: ॐ काम-मालिनी-केलि-लालिताय नम: ॐ सरस्वत्याश्रयाय नम: ॐ गौरी-नन्दनाय नम: ॐ श्री-निकेतनाय नम: ॐ गुरू-गुप्त-पदाय नम: ॐ वाचा-सिद्धाय नम: ॐ वागीश्वरी-पतये नम: ॐ नलिनी-कामुकाय नम: ॐ वामा-रामाय नम: ॐ ज्येष्ठा-मनोरमाय नम: ॐ रौद्री-मुद्रित-पादाब्जाय नम: ॐ हुम्बीजाय नम: ॐ तुंग-शक्तिकाय नम: ॐ विश्वादि-जनन-त्राणाय नम: ॐ स्वाहा-शक्तये नम: ॐ स-कीलकाय नम: ॐ अमृताब्धि-कृतावासाय नम: ॐ मद-घूर्णित-लोचनाय नम: ॐ उच्छिष्ठ-गणाय नम: ॐ उच्छिष्ठ-गणेशाय नम: ॐ गण नायकाय नम: ॐ सार्वकालिक-संसिद्धये नम: ॐ नित्य-शैवाय नम: ॐ दिगम्बराय नम: ॐ अनपायाय नम: ॐ अनन्त-दृष्टये नम: ॐ अप्रमेयाय नम: ॐ अजरामराय नम: ॐ अनाविलाय नम: ॐ अ-प्रतिरथाय नम: ॐ अच्युताय नम: ॐ अमृताय नम: ॐ अक्षराय नम: ॐ अ-प्रतर्क्याय नम: ॐ अक्षयाय नम: ॐ अजय्याय नम: ॐ अनाधाराय नम: ॐ अनामयाय नम: ॐ अमलाय नम: ॐ अमोघ-सिद्धये नम: ॐ अद्वैताय नम: ॐ अघोराय नम: ॐ अप्रतिमाननाय नम: ॐ अनाकाराय नम: ॐ अब्धि-भूम्यग्नि-बलघ्नाय नम: ॐ अव्यक्त-लक्षणाय नम: ॐ आधार-पीठाय नम: ॐ आधाराय नम: ॐ आधाराधेय-वर्जिताय नम: ॐ आखु-केतनाय नम: ॐ आशा-पूरकाय नम: ॐ आखु-महारथाय नम: ॐ इक्षु-सागर-मध्यस्थाय नम: ॐ इक्षु-भक्षण-लालसाय नम: ॐ इक्षु-चापातिरेक-श्रिये नम: ॐ इक्षु-चाप-निषेविताय नम: ॐ इन्द्र-गोप-समान-श्रिये नम: ॐ इन्द्र-नील-सम-द्युतये नम: ॐ इन्दीवर-दल-श्यामाय नम: ॐ इन्दु-मण्डल-निर्मलाय नम: ॐ इध्म-प्रियाय नम: ॐ इडा-भागाय नम: ॐ इडा-धाम्ने नम: ॐ इन्दिरा-प्रियाय नम: ॐ इक्ष्वाकु-विघ्न-विध्वंसिने नम: ॐ इति-कर्त्तव्यतेप्सिताय नम: ॐ ईशान-मौलये नम: ॐ ईशानाय नम: ॐ ईशान-सुताय नम: ॐ ईतिघ्ने नम: ॐ ईषणा-त्रय-कल्पान्ताय नम: ॐ ईहा-मात्र-विवर्जिताय नम: ॐ उपेन्द्राय नम: ॐ उडु-भृन्मौलये नम: ॐ उण्डेरक-बलि-प्रियाय नम: ॐ उन्नताननाय नम: ॐ उतुंगाय नम: ॐ उदार-त्रिदशाग्र-गण्ये नम: ॐ ऊर्जस्वते नम: ॐ ऊष्मल-मदाय नम: ॐ ऊहा-पोह-दुरासदाय नम: ॐ ऋग्-यजुस्साम-सम्भूतये नम: ॐ ऋद्धि-सिद्धि-प्रवर्तकाय नम: ॐ ऋजु-चितैक-सुलभाय नम: ॐ ऋण-त्रय-विमोचकाय नम: ॐ स्व-भक्तानां लुप्त-विघ्नाय नम: ॐ सुर-द्विषां लुप्त-शक्तये नम: ॐ विमुखार्चानां लुप्त-श्रिये नम: ॐ लूता-विस्फोट-नाशनाय नम: ॐ एकार-पीठ-मध्यस्थाय नम: ॐ एकपाद-कृतासनाय नम: ॐ एजिताखिल-दैत्य-श्रिये नम: ॐ एधिताखिल-संश्रयाय नम: ॐ ऐश्वर्य-निधये नम: ॐ ऐश्वर्याय नम: ॐ ऐहिकामुष्मिक-प्रदाय नम: ॐ एरम्मद-समोन्मेषाय नम: ॐ ऐरावत-निभाननाय नम: ॐ ओंकार-वाच्याय नम: ॐ ओंकाराय नम: ॐ ओजस्वते नम: ॐ ओषधि-पतये नम: ॐ औदार्य-निधये नम: ॐ औद्धत्य-धुर्याय नम: ॐ औन्नत्य-निस्वनाय नम: ॐ सुर-नागानामङ्कुशाय नम: ॐ सुर-विद्विषामङ्कुशाय नम: ॐ अ:-समस्त-विसर्गान्त-पदेषु-परिकीर्तिताय नम: ॐ कमण्डलु-धराय नम: ॐ कल्पाय नम: ॐ कपिर्दने नम: ॐ कलभाननाय नम: ॐ कर्म साक्षिणे नम: ॐ कर्म-कर्त्रे नम: ॐ कर्माकर्म-फल-प्रदाय नम: ॐ कदम्ब-गोलकाकाराय नम: ॐ कूष्माड-गणनायकाय नम: ॐ कारूण्य-देहाय नम: ॐ कपिलाय नम: ॐ कथकाय नम: ॐ कटि-सूत्र-भृते नम: ॐ खर्वाय नम: ॐ खड्ग-खान्तान्तस्थाय नम: ॐ ख-निर्मलाय नम: ॐ खल्वाट-श्रृंग-निलयाय नम: ॐ खट्वांगिने नम: ॐ ख-दुरासदाय नम: ॐ गुणाढयाय नम: ॐ गहनाय नम: ॐ ग-स्थाय नम: ॐ गद्य-पद्य-सुधार्णवाय नम: ॐ गद्य-गान-प्रियाय नम: ॐ गर्जाय नम: ॐ गीत-गीर्वाण-पूर्वजाय नम: ॐ गुह्याचार-रताय नम: ॐ गुह्याय नम: ॐ गुह्यागम-निरूपिताय नम: ॐ गुहाशयाय नम: ॐ गुहाब्धि-स्थाय नम: ॐ गुरू-गम्याय नम: ॐ गुरोर्गुरवे नम: ॐ घण्टा-घर्घरिका-मालिने नम: ॐ घट-कुम्भाय नम: ॐ घटोदराय नम: ॐ चण्डाय नम: ॐ चण्डेश्वर-सुहृदे नम: ॐ चण्डीशाय नम: ॐ चण्ड-विक्रमाय नम: ॐ चराचर-पतये नम: ॐ चिन्तामणि-चर्वण-लालसाय नम: ॐ छन्दसे नम: ॐ छन्दो-वपुषे नम: ॐ छन्दो-दुर्लक्ष्याय नम: ॐ छन्द-विग्रहाय नम: ॐ जगद्-योनये नम: ॐ जगत्-साक्षिणे नम: ॐ जगदीशाय नम: ॐ जगन्मयाय नम: ॐ जपाय नम: ॐ जप-पराय नम: ॐ जप्याय नम: ॐ जिह्वा-सिंहासन-प्रभवे नम: ॐ झलज्झल्लोल्लसद्-दान-झंकारि-भ्रमराकुलाय नम: ॐ टंकार-स्फार-संरावाय नम: ॐ टंकारि-मणि-नूपुराय नम: ॐ ठ-द्वयी-पल्लवान्तस्थ-सर्व-मन्त्रैक-सिद्धिदाय नम: ॐ डिण्डि-मुण्डाय नम: ॐ डाकिनीशाय नम: ॐ डामराय नम: ॐ डिण्डिम-प्रियाय नम: ॐ ढक्का-निनाद-मुदिताय नम: ॐ ढौकाय नम: ॐ ढुण्ढि-विनायकाय नम: ॐ तत्वानां परमाय तत्त्वाय नम: ॐ तत्वं-पद-निरूपिताय नम: ॐ तारकान्तर-संस्थानाय नम: ॐ तारकाय नम: ॐ तारकान्तकाय नम: ॐ स्थाणवे नम: ॐ स्थाणु-प्रियाय नम: ॐ स्थात्रे नम: ॐ स्थावराय जंगमाय जगते नम: ॐ दक्ष-यज्ञ-प्रमथनाय नम: ॐ दात्रे नम: ॐ दानव-मोहनाय नम: ॐ दया-वते नम: ॐ दिव्य-विभनाय नम: ॐ दण्ड-भृते नम: ॐ दण्ड-नायकाय नम: ॐ दन्त-प्रभिन्नाभ्र-मालाय नम: ॐ दैत्य-वारण-दारणाय नम: ॐ दंष्ट्रा-लग्न-द्विप-घटाय नम: ॐ देवार्थ-नृ-गजाकृतये नम: ॐ धन-धान्य-पतये नम: ॐ धन्याय नम: ॐ धनदाय नम: ॐ धरणी-धराय नम: ॐ ध्यानैक-प्रकटाय नम: ॐ ध्येयाय नम: ॐ ध्यानाय नम: ॐ ध्यान-परायणाय नम: ॐ नन्द्याय नम: ॐ नन्द्याय नम: ॐ निन्द-प्रियाय नम: ॐ नादाय नम: ॐ नाद-मध्य-प्रतिष्ठिताय नम: ॐ निष्कलाय नम: ॐ निर्मलाय नम: ॐ नित्याय नम: ॐ नित्यानित्याय नम: ॐ निरामयाय नम: ॐ परस्मै व्योम्ने नम: ॐ परस्मै धाम्ने नम: ॐ परमात्मने नम: ॐ परस्मै पदाय नम: ॐ परात्पराय नम: ॐ पशु-पतये नम: ॐ पशु-पाश-विमोचकाय नम: ॐ पूर्णानन्दाय नम: ॐ परानन्दाय नम: ॐ पुराण-पुरूषोत्तमाय नम: ॐ पद्म-प्रसन्न-नयनाय नम: ॐ प्रणताज्ञान-मोचनाय नम: ॐ प्रमाण-प्रत्ययातीताय नम: ॐ प्रणतार्ति-निवारणाय नम: ॐ फल-हस्ताय नम: ॐ फणि-पतये नम: ॐ फेत्काराय नम: ॐ फाणित-प्रियाय नम: ॐ बाणार्चिताङ्घ्रि-युगलाय नम: ॐ बाल-केलि-कुतूहलिने नम: ॐ ब्रह्मणे नम: ॐ ब्रह्मार्चित-पदाय नम: ॐ ब्रह्मचारिणे नम: ॐ बृहस्पतये नम: ॐ बृहत्तमाय नम: ॐ ब्रह्म-पराय नम: ॐ ब्रह्मण्याय नम: ॐ ब्रह्म-वित्-प्रियाय नम: ॐ बृहन्नादाग्रय-चीत्काराय नम: ॐ ब्रह्माण्डावलि-मेखलाय नम: ॐ भ्रु-क्षेप-दत्त-लक्ष्मी-काय नम: ॐ भर्गाय नम: ॐ भद्राय नम: ॐ भयापहाय नम: ॐ भगवते नम: ॐ भक्ति-सुलभाय नम: ॐ भूतिदाय नम: ॐ भूति-भूषणाय नम: ॐ भव्याय नम: ॐ भूतालयाय नम: ॐ भोगदात्रे नम: ॐ भ्रू-मध्य-गोचराय नम: ॐ मन्त्राय नम: ॐ मन्त्र-पतये नम: ॐ मिन्त्रणे नम: ॐ मद-मत्त-मनोरमाय नम: ॐ मेखलावते नम: ॐ मन्द-गतये नम: ॐ मति-मत्-कमलेक्षणाय नम: ॐ महा-बलाय नम: ॐ महा-वीर्याय नम: ॐ महा-प्राणाय नम: ॐ महा-मनसे नम: ॐ यज्ञाय नम: ॐ यज्ञ-पतये नम: ॐ यज्ञ-गोप्त्रे नम: ॐ यज्ञ-फल-प्रदाय नम: ॐ यशस्कराय नम: ॐ योग-गम्याय नम: ॐ याज्ञिकाय नम: ॐ याजक-प्रियाय नम: ॐ रसाय नम: ॐ रस-प्रियाय नम: ॐ रस्याय नम: ॐ रञ्जकाय नम: ॐ रावणार्चिताय नम: ॐ रक्षो-रक्षा-कराय नम: ॐ रत्न-गर्भाय नम: ॐ राज्य-सुख-प्रदाय नम: ॐ लक्ष्याय नम: ॐ लक्ष्य-प्रदाय नम: ॐ लक्ष्याय नम: ॐ लड्डुक-प्रियाय नम: ॐ लान-प्रियाय नम: ॐ लास्य-पराय नम: ॐ लाभ-कृते नम: ॐ लोक-विश्रुताय नम: ॐ वरेण्याय नम: ॐ वह्नि-वदनाय नम: ॐ वन्द्याय नम: ॐ वेदान्त-गोचराय नम: ॐ वि-कर्त्रे नम: ॐ विश्वतश्चक्षुषे नम: ॐ विधात्रे नम: ॐ विश्वतो-मुखाय नम: ॐ वाम-देवाय नम: ॐ विश्व-नेत्रे नम: ॐ वज्रि-वज्र-निवारणाय नम: ॐ विश्व-बन्धन-विष्कम्भा-धाराय नम: ॐ विश्वेश्वर-प्रभवे नम: ॐ शब्द-ब्रह्मणे नम: ॐ शम-प्राप्याय नम: ॐ शम्भु-शक्ति-गणेश्वराय नम: ॐ शास्त्रे नम: ॐ शिखाग्र-निलयाय नम: ॐ शरण्याय नम: ॐ शिखरीश्वराय नम: ॐ षड्-ऋतु-कुसुम-स्रिग्वणे नम: ॐ षडाधाराय नम: ॐ षडक्षराय नम: ॐ संसार-वैद्याय नम: ॐ सर्वज्ञाय नम: ॐ सर्व-भेषज-भेषजाय नम: ॐ सृष्टि-स्थिति-लय-क्रीडाय नम: ॐ सुर-कुंजर-भेदनाय नम: ॐ सिन्दुरित-महा-कुम्भाय नम: ॐ सद्सद्-व्यक्ति-दायकाय नम: ॐ साक्षिणे नम: ॐ समुद्र-मन्थनाय नम: ॐ स्व-संवेद्याय नम: ॐ स्व-दक्षिणाय नम: ॐ स्वतन्त्राय नम: ॐ सत्य-संकल्पाय नम: ॐ साम-गान-रताय नम: ॐ सुखिने नम: ॐ हंसाय नम: ॐ हस्ति-पिशाचीशाय नम: ॐ हवनाय नम: ॐ हव्य-कव्य-भुजे नम: ॐ हव्याय नम: ॐ हुत-प्रियाय नम: ॐ हर्षाय नम: ॐ हृल्लेखा-मन्त्र-मध्यगाय नम: ॐ क्षेत्राधिपाय नम: ॐ क्षमा-भर्त्रे नम: ॐ क्षमा-पर-परायणाय नम: ॐ क्षिप्र-क्षेम-कराय नम: ॐ क्षेमानन्दाय नम: ॐ क्षोणी-सुर-द्रुमाय नम: ॐ धर्म-प्रदाय नम: ॐ अर्थदाय नम: ॐ काम-दात्रे नम: ॐ सौभाग्य-वर्धनाय नम: ॐ विद्या-प्रदाय नम: ॐ विभवदाय नम: ॐ भुक्ति-मुक्ति-फल-प्रदाय नम: ॐ आभिरूप्य-कराय नम: ॐ वीर-श्री-प्रदाय नम: ॐ विजय-प्रदाय नम: ॐ सर्व-वश्य-कराय नम: ॐ गर्भ-दोषघ्ने नम: ॐ पुत्र-पौत्रदाय नम: ॐ मेधादाय नम: ॐ कीर्तिदाय नम: ॐ शोक-हारिणे नम ॐ दौर्भाग्य-नाशनाय नम: ॐ प्रति-वादि-मुख-स्तम्भाय नम: ॐ रूष्ट-चित्त-प्रसादनाय नम: ॐ पराभिचार-शमनाय नम: ॐ दु:ख-भंजन-कारकाय नम: ॐ लवाय नम: ॐ त्रुटये नम: ॐ कलायै नम: ॐ काष्ठायै नम: ॐ निमेषाय नम: ॐ तत्पराय नम: ॐ क्षणाय नम: ॐ घटयै नम: ॐ मुहूर्ताय नम: ॐ प्रहराय नम: ॐ दिवा-नक्ताय नम: ॐ अहर्निशाय नम: ॐ पक्षाय नम: ॐ मासाय नम: ॐ अयनाय नम: ॐ वर्षाय नम: ॐ युगाय नम: ॐ कल्पाय नम: ॐ महा-लयाय नम: ॐ राशये नम: ॐ तारायै नम: ॐ तिथये नम: ॐ योगाय नम: ॐ वाराय नम: ॐ करणाय नम: ॐ अंशकाय नम: ॐ लग्नाय नम: ॐ होरायै नम: ॐ काल-चक्राय नम: ॐ मेरवे नम: ॐ सप्तिर्षभ्यो नम: ॐ ध्रुवाय नम: ॐ राहवे नम: ॐ मन्दाय नम: ॐ कवये नम: ॐ जीवाय नम: ॐ बुधाय नम: ॐ भौमाय नम: ॐ शशिने नम: ॐ रवये नम: ॐ कालाय नम: ॐ सृष्टये नम: ॐ स्थितये नम: ॐ विश्वस्मै स्थावराय जंगमाय नम: ॐ भुवे नम: ॐ अद्भयो नम: ॐ अग्नये नम: ॐ मरूते नम: ॐ व्योम्ने नम: ॐ अहङ्कृतये नम: ॐ प्रकृतये नम: ॐ पुंसे नम: ॐ ब्रह्मणे नम: ॐ विष्णवे नम: ॐ शिवाय नम: ॐ रूद्राय नम: ॐ ईशाय नम: ॐ शक्तये नम: ॐ सदा-शिवाय नम: ॐ त्रिदशेभ्यो नम: ॐ पितृभ्यो नम: ॐ सिद्धेभ्यो नम: ॐ यक्षेभ्यो नम: ॐ रक्षोभ्यो नम: ॐ किन्नरेभ्यो नम: ॐ साध्येभ्यो नम: ॐ विद्याधरेभ्यो नम: ॐ भूतेभ्यो नम: ॐ खगेभ्यो नम: ॐ समुद्रभ्यो नम: ॐ सरिद्भ्यो नम: ॐ शैलेभ्यो नम: ॐ भूताय नम: ॐ भव्याय नम: ॐ भवोद्भवाय नम: ॐ सांखयाय नम: ॐ पातंजलाय नम: ॐ योगाय नम: ॐ पुराणेभ्यो नम: ॐ श्रुत्यै नम: ॐ स्मृत्यै नम: ॐ वेदांगेभ्यो नम: ॐ सदाचाराय नम: ॐ मीमांसायै नम: ॐ न्याय-विस्तराय नम: ॐ आयुर्वेदाय नम: ॐ धनुर्वेदाय नम: ॐ गान्धर्वाय नम: ॐ काव्य-नाटकाय नम: ॐ वैखानसाय नम: ॐ भागवताय नम: ॐ सात्वताय नम: ॐ पाञ्च-रात्रकाय नम: ॐ शैवाय नम: ॐ पाशुपताय नम: ॐ काला-मुखाय नम: ॐ भैरव-शासनाय नम: ॐ शाक्ताय नम: ॐ वैनायकाय नम: ॐ सौराय नम: ॐ जैनाय नम: ॐ आर्हत-संहितायै नम: ॐ सते नम: ॐ असते नम: ॐ व्यक्ताय नम: ॐ अ-व्यक्ताय नम: ॐ स-चेतनाय नम: ॐ अ-चेतनाय नम: ॐ बन्धाय नम: ॐ मोक्षाय नम: ॐ सुखाय नम: ॐ भोगाय नम: ॐ अ-योगाय नम: ॐ सत्याय नम: ॐ अणवे नम: ॐ महते नम: ॐ स्वस्ति नम: ॐ हुं नम: ॐ फट् नम: ॐ स्वधा नम: ॐ स्वाहा नम: ॐ श्रौष्ट् नम: ॐ वौष्ट् नम: ॐ वषट् नम: ॐ नमो नम: ॐ ज्ञानाय नम: ॐ विज्ञानाय नम: ॐ आनन्दाय नम: ॐ बोधाय नम: ॐ संविदे नम: ॐ शमाय नम: ॐ यमाय नम: ॐ एकस्मै नम: ॐ एकाक्षराधाराय नम: ॐ एकाक्षर-परायणाय नम: ॐ एकाग्र-धिये नम: ॐ एक-वीराय नम: ॐ एकानेक-स्वरूप-धृते नम: ॐ द्वि-रूपाय नम: ॐ द्वि-भुजाय नम: ॐ द्वयक्षाय नम: ॐ द्विरदाय नम: ॐ द्वीप-रक्षकाय नम: ॐ द्वै-मातुराय नम: ॐ द्वि-वदनाय नम: ॐ द्वन्द्वातीताय नम: ॐ द्वयातिगाय नम: ॐ त्रि-धाम्ने नम: ॐ त्रि-कराय नम: ॐ त्रेता-त्रिवर्ग-फल-दायकाय नम: ॐ त्रिगुणात्मने नम: ॐ त्रिलोकादये नम: ॐ त्रिशक्तिशाय नम: ॐ त्रिलोचनाय नम: ॐ चतुर्बाहवे नम: ॐ चतुर्दन्ताय नम: ॐ चतुरात्मने नम: ॐ चतुर्मुखाय नम: ॐ चतुर्विधोपाय-मयाय नम: ॐ चतुर्वर्णाश्रमाश्रयाय नम: ॐ चतुर्विध-वचो-वृत्ति-परिवृत्ति-प्रवर्तकाय नम: ॐ चतुर्थी-पूजन-प्रीताय नम: ॐ चतुर्थी-तिथि-सम्भवाय नम: ॐ पंचाक्षरात्मने नम: ॐ पंचात्मने नम: ॐ पंचास्याय नम: ॐ पंच-कृत्य-कृते नम: ॐ पंचाधाराय नम: ॐ पंच-वर्णाय नम: ॐ पंचाक्षर-परायणाय नम: ॐ पंच-तालाय नम: ॐ पंच-कराय नम: ॐ पंच-प्रणव-भाविताय नम: ॐ पंच-ब्रह्म-मय-स्फूर्तये नम: ॐ पंचावरण-वारिताय नम: ॐ पंच-भक्ष्य-प्रियाय नम: ॐ पंच-बाणाय नम: ॐ पंच-शिवात्मकाय नम: ॐ षट्-कोण-पीठाय नम: ॐ षट्-चक्र-धाम्ने नम: ॐ षड्-ग्रिन्थ-भेदकाय नम: ॐ षडध्व-ध्वान्त-विध्वंसिने नम: ॐ षडङ्गुल-महा-हृदाय नम: ॐ षण्मुखाय नम: ॐ षण्मुख-भ्रात्रे नम: ॐ षट्-शक्ति-परिवारिताय नम: ॐ षड्-वैरि-वर्ग-विध्वंसिने नम: ॐ षडूर्मि-भय-भंजनाय नम: ॐ षट्-तर्क-दूराय नम: ॐ षट्-कर्म-निरताय नम: ॐ षड्-रसाश्रयाय नम: ॐ सप्त-पाताल-चरणाय नम: ॐ सप्त-द्वीपोरू-मण्डलाय नम: ॐ सप्त-स्वर्लोक-मुकुटाय नम: ॐ सप्त-सप्ति-वर-प्रदाय नम: ॐ सन्तांग-राज्य-सुखदाय नम: ॐ सप्तिर्ष-गण-मण्डिताय नम: ॐ सप्तछन्दो-निधये नम: ॐ सप्त-होत्रे नम: ॐ सप्त-स्वराश्रयाय नम: ॐ सप्ताब्धि-केलि-कासाराय नम: ॐ सप्त-मातृ-निषेविताय नम: ॐ सप्तच्छन्दो-मोद-मदाय नम: ॐ सप्तच्छन्दो-मख-प्रभवे नम: ॐ अष्ट-मूर्ति-ध्येय-मूर्तये नम: ॐ अष्ट-प्रकृति-कारणाय नम: ॐ अष्टांग-योग-फल-भुवे नम: ॐ अष्टैश्वर्य-प्रदायकाय नम: ॐ अष्ट-पीठोप-पीठ-श्रिये नम: ॐ अष्ट-मातृ-समावृताय नम: ॐ अष्ट-भैरव सेव्याय नम: ॐ अष्ट-वसु-वन्द्याय नम: ॐ अष्ट-मूर्ति-भृते नम: ॐ अष्ट-चक्र-स्फुरन्मूर्तये नम: ॐ अष्ट-द्रव्य-हवि:-प्रियाय नम: ॐ नव-नागासनाध्यासिने नम: ॐ नव-निध्यनु-शासित्रे नम: ॐ नवद्वार-पुराधाराय नम: ॐ नवाधार-निकेतनाय नम: ॐ नव-नारायण-स्तुत्याय नम: ॐ नव-दुर्गा-निषेविताय नम: ॐ नवनाथ-महानाथाय नम: ॐ नवनाग-विभूषणाय नम: ॐ नवरत्न-विचित्रांगाय नम: ॐ नवशक्ति-शिरो-धृताय नम: ॐ दशात्मकाय नम: ॐ दश-भुजाय नम: ॐ दश-दिक्पति-विन्दताय नम: ॐ दशाध्यायाय नम: ॐ दश-प्राणाय नम: ॐ दशेन्द्रिय-नियामकाय नम: ॐ दशाक्षर-महामन्त्राय नम: ॐ दशाशा-व्यापि-विग्रहाय नम: ॐ एकादशादिभि-रूदै:-स्तुताय नम: ॐ एकादशाक्षराय नम: ॐ द्वादशोद्दण्ड–दोर्दण्डाय नम: ॐ द्वादशान्त-निकेतनाय नम: ॐ त्रयोदशाभिधा·भिन्न-विश्वदेवाधि-दैवताय नम: ॐ चतुर्दशेन्द्र-वरदाय नम: ॐ चतुर्दश-मनु-प्रभवे नम: ॐ चतुर्दशादि-विद्याढयाय नम: ॐ चतुर्दश-जगत्-प्रभवे नम: ॐ साम-पंच-दशाय नम: ॐ पंचदशी-शीतांशु-निर्मलाय नम: ॐ षोडशाधार-निलयाय नम: ॐ षोडश-स्वा-मातृकाय नम: ॐ षोडशान्त-पदावासाय नम: ॐ षोडशेन्दु-कलात्मकाय नम: ॐ कलायै-सप्त-दश्यै नम: ॐ सप्त-दशाय नम: ॐ सप्त-दशाक्षराय नम: ॐ अष्टादश-द्वीप-पतये नम: ॐ अष्टादश-पुराण-कृते नम: ॐ अष्टादशौषधी-सृष्टये नम: ॐ अष्टादश-विधि-स्मृताय नम: ॐ अष्टादश-लिपि-व्यष्टि-समष्टि-ज्ञान-कोविदाय नम: ॐ एकविंशाय पुंसे नम: ॐ एकविंशत्यङ्गुलि-पल्लवाय नम: ॐ चतुर्विंशति-तत्त्वात्मने नम: ॐ पंच-विंशाख्य-पुरूषाय नम: ॐ सप्तविंशति-तारेशाय नम: ॐ सप्तविंशति-योगकृते नम: ॐ द्वात्रिंशद्-भैरवाधीशाय नम: ॐ चतुस्त्रिंन्महा-हृदाय नम: ॐ षट्-त्रिंशत्-तत्त्व-सम्भूतये नम: ॐ अष्टत्रिंशत्-कला-तनवे नम: ॐ नमदेकोन-पंचाशन्मरूद्-वर्ग-निरर्गलाय नम: ॐ पंचाशदक्षर-श्रेण्यै नम: ॐ पंचाशद्-रूद्र-विग्रहाय नम: ॐ पंचाशद्-विष्णु-शक्तिशाय नम: ॐ पंचाशन्मातृका-लयाय नम: ॐ द्वि-पंचाशद्-वपुश्श्रेण्यै नम: ॐ त्रिषष्टयक्षर-संश्रयाय नम: ॐ चतुष्षष्टयर्ण-निर्णेत्रे नम: ॐ चतुष्षष्टि-कला-निधये नम: ॐ चतुष्षष्टि-महासिद्ध-योगिनी-वृन्द-विन्दताय नम: ॐ अष्ट-षष्टि-महातीर्थ-क्षेत्रभैरव-भावनाय नम: ॐ चतुर्णवति-मन्त्रात्मने नम: ॐ षण्णवत्यधिक-प्रभवे नम: ॐ शतानन्दाय नम: ॐ शत-धृतये नम: ॐ शत-पत्रायतेक्षणाय नम: ॐ शतानीकाय नम: ॐ शत-मखाय नम: ॐ शतधार-वरायुधाय नम: ॐ सहस्त्र-पत्र-निलयाय नम: ॐ सहस्त्र-फण-भूषणाय नम: ॐ सहस्त्र-शीर्ष्णे-पुरूषाय नम: ॐ सहस्त्राक्षाय नम: ॐ सहस्त्र-पदे नम: ॐ सहस्त्रनाम-संस्तुत्याय नम: ॐ सहस्त्राक्ष-बलापहाय नम: ॐ दश-साहस्त्र-फणभृत्-फणिराज-कृतासनाय नम: ॐ अष्टाशीति-सहस्त्राद्य-महर्षि-स्तोत्र-यन्त्रिताय नम: ॐ लक्षाधीश-प्रियाधाराय नम: ॐ लक्षाधार-मनोमयाय नम: ॐ चतुर्लक्ष-जप-प्रिताय नम: ॐ चतुर्लक्ष-प्रकाशिताय नम: ॐ चतुरशीति-लक्षाणां जीवानां देह-संस्थिताय नम: ॐ कोटि-सूर्य-प्रतीकाशाय नम: ॐ कोटि-चन्द्रांशु-निर्मलाय नम: ॐ शिवा-भवाध्युष्ट-कोटि-विनायक-धुरन्धराय नम: ॐ सप्तकोटि-महामन्त्र-मन्त्रितावयव-द्युतये नम: ॐ त्रयस्त्रिंशत्-कोटि-सुरश्रेणी-प्रणत-पादुकाय नम: ॐ अनन्त-नाम्ने नम: ॐ अनन्त-श्रिये नम: ॐ अनन्तानन्त-सौख्यदाय नम: Share this: Print (Opens in new window) Print Post Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Like this:Like Loading… Related posts: परिचय Gajendra moksha – गजेन्द्र मोक्ष hindi jokes-हिन्दी जोक्स महालक्ष्मी स्तुति देवी कवच-devi kavach शेरो-शायरी Surya Ashtotarshatnam-सूर्य अष्टोत्तरशत नामावली history of 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