श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -053 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -053 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ तिरपनवाँ अध्याय भुवनकोश वर्णन में प्लक्ष, शाल्मलि, क्रौंच द्वीपों के महापर्वतों, ऊर्ध्व लोकों तथा नरकों का वर्णन, सर्वत्र सदाशिव की व्यापकता एवं यक्षरूप शिव और भगवती उमा का माहात्म्य श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः भुवनकोशविन्यासनिर्णय सूतजी बोले — प्लक्ष आदि सात द्वीपों में सात पर्वत हैं, जो सीधे, लम्बे तथा… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -052 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -052 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ बावनवाँ अध्याय विभिन्न द्वीपों की नदियों का वर्णन, केतुमाल, कुरुवर्ष, भारतवर्ष, किम्पुरुष आदि वर्षों में रहने वाले लोगों तथा उनकी लोकवृत्ति का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे द्विपञ्चाशत्तमोऽध्यायः भुवनकोशस्वभाववर्णनं सूतजी बोले — हे श्रेष्ठ ब्राह्मणो ! प्रत्येक वर्ष में सदा विपुल जल से भरी हुई बहुत-सी असंख्य पवित्र नदियाँ बतायी… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -051 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -051 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ इक्यावनवाँ अध्याय दिव्य भूतवन में महादेव के निवास स्थान का वर्णन, कैलास तथा वहाँ की पवित्र नदियों का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे एकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः विविधद्वीपशोभावर्णनं सूतजी बोले — बड़ी-बड़ी चोटियों वाले, अत्यन्त सुन्दर, स्वर्ण- वैडूर्य, माणिक्य-नीलम-गोमेद तथा अन्य बहुमूल्य मणियों से निर्मित, स्वच्छ, पवित्र, सौ हजार शाखाओं से युक्त, सभी… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -050 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -050 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ पचासवाँ अध्याय भुवनविन्यास में विभिन्न कुलाचल पर्वतों पर रहने वाली देवयोनियों आदि का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे पञ्चाशत्तमोऽध्यायः भुवनविन्यासोद्देशस्थानवर्णनं सूतजी बोले — इन्द्र शितान्त के शिखर पर विद्यमान सुन्दर पारिजातवन में रहते हैं। उसके पूर्व में कुमुदपर्वत की चोटी है, वह बहुत विस्तृत है । हे श्रेष्ठ द्विजो !… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -049 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -049 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ उनचासवाँ अध्याय जम्बूद्वीप का विस्तृत वर्णन, वहाँ के कुलपर्वतों, नदियों, वनों तथा वहाँ रहने वाले लोगों का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे एकोनपञ्चाशत्तमोऽध्यायः जम्बूद्वीपवर्णनं सूतजी बोले — यह द्वीप एक लाख योजन विस्तृत कहा गया है। इसके समीप में स्थित प्लक्ष नामक द्वीप उसका दुगुना है और बाद वाले द्वीप… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -048 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -048 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ अड़तालीसवाँ अध्याय भूमध्य में स्थित मेरु (सुमेरु) पर्वत और इन्द्र आदि लोकपालों की पुरियों का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे अष्टचत्वारिंशोऽध्याय मेरुगिरिवर्णनं सूतजी बोले — इस द्वीप के मध्य में मेरु नामक महान् पर्वत है। पर्वतों में श्रेष्ठ यह अनेक प्रकार के रत्नों से पूर्ण शिखरों से यह युक्त होकर… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -047 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -047 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ सैंतालीसवाँ अध्याय जम्बूद्वीप के अधिपति प्रियव्रत के पुत्र महाराज आग्नीध्र का वंश वर्णन तथा आग्नीध्र के शिवभक्त नौ पुत्रों का अजनाभ वर्ष ( भारतवर्ष), किम्पुरुष वर्ष आदि नौ वर्षों (देशों ) – का स्वामी बनना श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे सप्तचत्वारिंशोऽध्यायः भरतवर्षकथनं सूतजी बोले — राजा प्रियव्रत ने अपने ज्येष्ठ उत्तराधिकारी… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -046 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -046 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ छियालीसवाँ अध्याय भुवन सन्निवेश में सात द्वीपों तथा सात समुद्रों का वर्णन एवं सर्वत्र भगवान् शिव की व्यापकता, स्वायम्भुव मन्वन्तर के प्रियव्रतादि राजवंशों का वर्णन, जम्बूद्वीप, कुशद्वीप तथा क्रौंचद्वीप के राजाओं का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे षट्चत्वारिंशोऽध्यायः भुवनकोशे द्वीपद्वीपेश्वरकथनं सूतजी बोले — [हे ऋषियो!] पृथ्वी सात द्वीपों से युक्त… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -045 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -045 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ पैंतालीसवाँ अध्याय भगवान् रुद्र के विराट् स्वरूप तथा सात पाताल लोकों का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः पातालवर्णनं ऋषिगण बोले — हे सूतजी ! आपने शंकरजी के विषय में सब कुछ स्पष्ट रूप से कह दिया, अब आप रुद्र के सर्वात्मभाव तथा स्वरूप को बताने की कृपा कीजिये ॥… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -044 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -044 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ चौवालीसवाँ अध्याय भगवान् शिव द्वारा नन्दिकेश्वर को गणों के अधिपति के रूप में प्रतिष्ठित करना एवं सभी देवों के द्वारा नन्दिकेश्वर का अभिषेक तथा शिवनाममन्त्र की महिमा श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे चतुश्चत्वारिंशोऽध्यायः नन्दिकेश्वराभिषेक शैलादि बोले — रुद्र के स्मरण करते ही गणेश्वर लोग उपस्थित हो गये। उन सभी की हजार-हजार… Read More Like this:Like Loading…