श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -073 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -073 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ तिहत्तरवाँ अध्याय लिङ्गार्चन की विधि तथा उसकी महिमा श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे त्रिसप्ततितमोऽध्यायः ब्रह्मप्रोक्तलिङ्गार्चनविधि सूतजी बोले — [ हे ऋषियो ! ] क्षणभर में त्रिपुर को जलाकर देव महेश्वर के चले जाने पर भगवान् पद्मयोनि (ब्रह्मा) – ने श्रेष्ठ देवताओं की सभा में [इस प्रकार ] कहा — ॥ १… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -072 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -072 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ बहत्तरवाँ अध्याय त्रिपुरासुर वध के लिये विश्वकर्मा द्वारा एक दिव्य रथ का निर्माण तथा भगवान् महेश्वर का उस रथ पर आरूढ़ हो त्रिपुरासुर को दग्ध करना एवं ब्रह्मा द्वारा भगवान् शिव की स्तुति श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे द्विसप्तितमोऽध्यायः त्रिपुरदाहे ब्रह्मस्तवं सूतजी बोले — [ हे ऋषियो!] विश्वकर्मा ने प्रयत्न के… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -071 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -071 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ इकहत्तरवाँ अध्याय तारकासुर के पुत्रों — विद्युन्माली, तारकाक्ष तथा कमलाक्ष का वृत्तान्त एवं तपस्या द्वारा इन्हें कामचारी तीन पुरों की प्राप्ति, त्रिपुरासुर के विनाश के लिये देवताओं का उद्योग तथा भगवान् शंकर का उन पर अनुग्रह श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे एकसप्ततितमोऽध्यायः पुरदाहे नन्दिकेश्वरवाक्यं ऋषिगण बोले — [हे सूतजी !] आपने… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -070 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -070 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ सत्तरवाँ अध्याय महेश्वर से होने वाली आदिसृष्टि का स्वरूप, नवविध सर्ग वर्णन एवं प्राजापत्य सर्ग निरूपण तथा भगवती सती की देह से अनेक देवियों का प्रादुर्भाव श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे सप्ततितमोऽध्यायः सृष्टिविस्तार ऋषिगण बोले — हे सूतजी ! हे सुव्रत ! आपने आदिसृष्टि का परिचय मात्र दिया, उस पर प्रकाश… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -069 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -069 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ उनहत्तरवाँ अध्याय चन्द्रवंश-वर्णन में भगवान् श्रीकृष्ण के अवतार की कथा तथा संक्षेप में कृष्णचरित का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे एकोनसप्ततितमोऽध्यायः सोमवंशानुकीर्तनं सूतजी बोले — [हे ऋषियो!] सत्यसम्पन्न सात्त्वत ने तेजस्वी भजन, दिव्य राजा देवावृध, महाभाग्यशाली अन्धक तथा यदुनन्दन वृष्णि — इन चार पुत्रों को उत्पन्न किया। अब उनके चारों… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -068 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -068 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ अड़सठवाँ अध्याय ययातिपुत्र यदु के वंश का वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे अष्टषष्टितमोऽध्यायः वंशानुवर्णनं सूतजी बोले — [ ऋषियो !] अब मैं [ ययाति के ] उत्तम तेज वाले ज्येष्ठ पुत्र यदु के वंश का क्रमानुसार संक्षेप में वर्णन करूँगा; मुझ कहने वाले से [आप लोग ] सुनें । यदु… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -067 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -067 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ सड़सठवाँ अध्याय राजर्षि ययाति का आख्यान तथा ययाति गाथा श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे सप्तषष्टितमोऽध्यायः सोमवंशे ययाति चरितं ययाति बोले — श्रेष्ठ ब्राह्मण तथा सभी वर्ण के लोग मेरा वचन सुनें — ‘मैं ज्येष्ठ पुत्र को कभी भी राज्य नहीं दूँगा । ज्येष्ठ पुत्र यदु ने मेरी आज्ञा का पालन नहीं… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -066 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -066 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ छाछठवाँ अध्याय इक्ष्वाकुवंशी राजाओं की कथा तथा ययातिवंश – वर्णन श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे षट्षष्टितमोऽध्याय इक्ष्वाकु वंश वर्णनं सूतजी बोले — [ हे द्विजो !] त्रिधन्वा ने देवदेव तण्डी की कृपा से प्रयत्नपूर्वक हजार अश्वमेधयज्ञों का फल प्राप्त करके सभी देवताओं से नमस्कृत होकर महान् गणाधिपपद प्राप्त कर लिया। उन… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -065 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -065 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ चौंसठवाँ अध्याय वसिष्ठपुत्र शक्ति का आख्यान तथा महर्षि पराशर की कथा श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे पञ्चषष्टितमोऽध्यायः रुद्रसहस्रनामकथनं 1 ऋषिगण बोले — हे वंशविदों में श्रेष्ठ ! हे रोमहर्षण ! आप संक्षेप में सूर्यवंश तथा चन्द्रवंश के विषय में हम लोगों को बताने की कृपा करें ॥ १ ॥ सूतजी बोले… Read More Like this:Like Loading…
श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -064 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -064 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ चौंसठवाँ अध्याय वसिष्ठपुत्र शक्ति का आख्यान तथा महर्षि पराशर की कथा श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे चतुःषष्टितमोऽध्यायः वासिष्ठकथनं ऋषिगण बोले — हे वक्ताओं में श्रेष्ठ सूतजी ! राक्षस [रुधिर]-ने अनुजों सहित वसिष्ठपुत्र शक्ति का भक्षण कैसे कर लिया; इसे आप कृपा करके बताइये ॥ १ ॥ सूतजी बोले — रुधिर नामक… Read More Like this:Like Loading…