4 February 2026 | aspundir | Leave a comment श्रीलिङ्गमहापुराण -[उत्तरभाग] -002 ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ दूसरा अध्याय भगवद्गुणगान का माहात्म्य श्रीलिङ्गमहापुराणे उत्तरभागे द्वितीयोऽध्यायः विष्णुमाहात्म्यं मार्कण्डेयजी बोले — [हे राजन् ! ] तदनन्तर परमात्मा नारायण ने कालयोग से उन्हें सम्पूर्ण ज्ञान प्रदान करके उन मुनिश्रेष्ठ नारद को तुम्बुरु के समान कर दिया। पूर्वकाल में ऐसी घटना हुई थी। नारायण के गीतों का श्रेष्ठ गान बार-बार करना चाहिये । गान से प्रसन्न होकर भगवान् श्रीहरि सत्कीर्ति, ज्ञान, ओज, तुष्टि तथा अपना लोक प्रदान करते हैं, जैसे उन्होंने कौशिक, पद्माक्ष आदि को पूर्णरूप से सिद्धि प्रदान की थी। अतः हे महाराज! हे नृप! आपको विशेष रूप से विष्णुक्षेत्र में विष्णुभक्त पुरुषों के साथ गान, नृत्य आदि तथा वाद्य-उत्सव से युक्त भगवान् का नित्य अर्चन करना चाहिये और उनकी कथा सुननी चाहिये; वे भगवान् श्रीहरि ही सर्वथा श्रवण के योग्य हैं ॥ १-५१/२ ॥ हे राजन्! जो विद्वान् भक्तिपरायण होकर विष्णुक्षेत्र में गान, नृत्य और विष्णु के आख्यान तथा कथा को सम्पादित कराता है, उसे पूर्वजन्म की स्मृति, वैराग्य-भावना, मेधा, वैराग्य के प्रति इच्छा और विष्णुसायुज्य की प्राप्ति हो जाती है; यह सत्य है ॥ ६-७१/२ ॥ हे राजन् ! मैंने यह सब आपसे कह दिया, जिसे आपने मुझसे पूछा था । हे धर्मधारियों में श्रेष्ठ ! मैं अब आपको और क्या बताऊँ, पूछिये ॥ ८-९ ॥ ॥ इस प्रकार श्रीलिङ्गमहापुराण के अन्तर्गत उत्तरभाग में ‘ विष्णुमाहात्म्य’ नामक दूसरा अध्याय पूर्ण हुआ ॥ २ ॥ Content is available only for registered users. Please login or register Share this: Print (Opens in new window) Print Post Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Like this:Like Loading… Related Discover more from Vaidicjagat Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Related posts: श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -008 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -016 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -024 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -032 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -040 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -048 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -056 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -064 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -072 श्रीलिङ्गमहापुराण -[पूर्वभाग] -080 Powered by YARPP.